Last Updated:July 31, 2026, 17:46 IST
Paddy Farming Tips: धान की खेती में खाद का सही संतुलन और समय पर इस्तेमाल बंपर पैदावार की कुंजी है, तो चलिए जानते है रोपाई से लेकर बालियां निकलने तक पोषक तत्वों की सटीक मात्रा और कीटों से बचने के जैविक उपाय..
Dhan Kheti Tips: धान की खेती में सही खाद और उसके सही समय का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. फसल को सही समय पर जब जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं तो उसकी जड़ें मजबूत होती हैं, पौधों में नए कल्ले और फुटाव ज्यादा आते हैं और इसका सीधा फायदा उत्पादन पर दिखता है. अगर खाद देने में थोड़ी भी देरी हो जाए या गलत मात्रा का इस्तेमाल हो तो पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है और पैदावार काफी कम हो जाती है. किसान अंशुमान सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि धान के पूरे फसल चक्र के दौरान मुख्य रूप से तीन अलग-अलग चरणों में संतुलित खुराक देना बेहद जरूरी होता है.
रोपाई के समय दें खाद की पहली खुराक
धान की फसल चक्र की शुरुआत रोपाई के साथ होती है और इसी समय खाद की पहली खुराक दी जाती है. खेत तैयार करते समय या रोपाई के तुरंत बाद प्रति एकड़ के हिसाब से 45 किलो डीएपी, 25 किलो एमओपी, 5 किलो जिंक सल्फेट और 5 किलो ह्यूमिक एसिड का इस्तेमाल करना चाहिए. यह खाद पौधों को शुरुआती ताकत देती है जिससे जड़ें जमीन में गहराई तक जाकर सही ढंग से विकसित हो पाती हैं. ध्यान रहे कि खाद डालते समय खेत में लगभग 3 से 5 cm तक पानी का स्तर बना होना चाहिए] ताकि पोषक तत्व मिट्टी में सही तरीके से घुल सकें.
इस समय दें यूरिया की दूसरी खुराक
धान की रोपाई के करीब 15-20 दिनों के बाद फसल में कल्ले या टिलरिंग की प्रक्रिया शुरू होने लगती है. पौधों के बेहतर वानस्पतिक विकास और कल्लों में शानदार फुटाव के लिए इस समय खाद की दूसरी खुराक दी जाती है. इसके लिए प्रति एकड़ खेत में 25 किलो यूरिया का इस्तेमाल करना सबसे फायदेमंद रहता है. रोपाई के 20 से 30 दिन के भीतर यूरिया की यह खुराक मिलने से पौधों का रंग गहरा हरा होता है और उनमें तेजी से नए कल्ले निकलते हैं जो आगे चलकर अच्छी बालियों में बदलते हैं.
तब डालें आखिरी खुराक, दाने भरेंगे भरपूर
फसल की तीसरी और अंतिम खुराक रोपाई के लगभग 50 से 60 दिन बाद यानी पैनिकल इनीशिएशन अवस्था यानी बालियां बनने की शुरुआती स्टेज में दी जाती है. इस समय बालियों की अच्छी लंबाई और दानों के ठोस भराव के लिए प्रति एकड़ 25 किलो यूरिया और 15 किलो पोटाश को मिलाकर खेत में डालना चाहिए. ध्यान रखें कि इस खुराक को हमेशा बालियां बाहर निकलने से पहले ही खेत में छिड़क देना चाहिए. अगर सही समय पर पोटाश और यूरिया की यह मात्रा दी जाए तो फसल के दाने चमकदार, वजनी और सेहतमंद बनते हैं.
नीम ऑयल का देशी फॉर्मूला रखेगा कीटों को दूर
धान की फसल को हानिकारक कीटों जैसे बीपीएच और पत्ती लपेटक से बचाने के लिए किसी महंगे रासायनिक कीटनाशक की जगह प्राकृतिक तरीका अपनाया जा सकता है. इसके लिए 3 से 5 मिलीलीटर नीम ऑयल या को प्रति लीटर पानी में मिलाकर घोल तैयार करें. इस घोल में चिपकने वाले पदार्थ के तौर पर प्रति लीटर पानी में 1 से 2 बूंद लिक्विड सोप या सर्फ मिला लें और सुबह या शाम के समय पौधों पर छिड़काव करें. यह प्राकृतिक बायो-पेस्टीसाइड कीटों की भूख कम करता है, उनके अंडे देने की क्षमता रोकता है और बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए फसल को पूरी तरह सुरक्षित रखता है.
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